हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैफ़ी आमोली ने हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई के हज के अवसर पर जारी संदेश की ओर इशारा करते हुए कहा,ईरान की जनता को इस साल ईदुल-अज़हा को इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के आदेश पर अमल करते हुए, अमेरिकी-सायोनी दुश्मनों के खिलाफ़ विलायत-ए-फ़क़ीह के चारों ओर एक पवित्र एकता का अवसर बनाना चाहिए, ताकि हम अमेरिका की आतंकवादी सरकार के अंतिम सैनिक का इस क्षेत्र से अंतिम रूप से बाहर निकलना देख सकें।
उन्होने मदरसा इल्मिया हुज्जत (अ.ज.) के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन अली सैफ़ी आमोली ने ईदुल-अज़हा को मुसलमानों की सहानुभूति, भाईचारे और समानता की ईद करार दिया और सामर्थ्य रखने वाले मोमिनों से अपील की कि वे इन दिनों में जरूरतमंद और पीड़ित लोगों और परिवारों की मदद करके इस इस्लामी ईद का सम्मान करें।
उन्होंने कहा,इस्लाम में दो ईदें सभी मुसलमानों में प्रसिद्ध और ज्ञात हैं और इस संबंध में पूरे इतिहास में शिया और सुन्नी के बीच कोई मतभेद नहीं रहा है और न ही आज है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैफ़ी आमोली ने ईद-उल-अज़हा के मुसलमानों के एकता और भाईचारे में स्थान को स्पष्ट करते हुए कहा, ईदुल-अज़हा, जिसे हम इब्राहीमी ईद कहते हैं, दुनिया के सभी मुसलमानों की ईद है और जो लोग मुसलमान हैं, वे इस ईद को भाईचारे और समानता के साथ मनाते हैं।
तेहरान के हौज़ा ए इल्मिया के उस्ताद ने कहा, मुसलमान पूरे इतिहास में शिया और सुन्नी सभी एक साथ रहे हैं। जो लोग शिया और सुन्नी के बीच तफ़रक़ा (फूट) डालना चाहते हैं, वे न तो शिया हैं और न ही सुन्नी, क्योंकि हमारे इस्लामी इतिहास में तफ़रक़ा नहीं है।
उन्होंने आगे कहा, सहनशीलता और एक दूसरे की मदद करना हमारे धर्म का मूल है। इस्लाम धर्म एकता, भाईचारे और एक दूसरे की मदद करने का धर्म है, जैसा कि अल्लाह तआला कुरान-ए-करीम में फरमाता है:
"تَعَاوَنُوا عَلَی الْبِرِّ وَالتَّقْوَی وَلَا تَعَاوَنُوا عَلَی الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ"
अर्थात: "तुम हमेशा नेक कामों और परहेज़गारी में एक दूसरे की मदद करो, लेकिन खबरदार, गुनाह और ज़्यादती के कामों में मदद न करो।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैफ़ी आमोली ने कहा, हम मुसलमान हैं, इसलिए हमें एक दूसरे को याद रखना चाहिए और एक दूसरे की फ़रियाद-रसी (मदद) करनी चाहिए, न केवल ईदुल-अज़हा में, बल्कि हमेशा।
लेकिन ईदुल-अज़हा इस्लाम की ईद है और सभी मुसलमानों को खुश होना चाहिए, विशेष रूप से जो लोग धन-संपत्ति के मालिक हैं, उन पर वाजिब और आवश्यक है कि अपनी ताकत के अनुसार निर्धनों का हाल जानें और उनकी देखभाल और मदद करें।
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